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गोमूत्र सबसे अमूल्य : दीक्षित
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Saturday, July 31, 2010
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नोहर (मुकेश पारीक)। स्वदेशी जागरण अभियान के प्रणेता व भारत स्वाभिमान आन्दोलन के प्रखर प्रवक्ता राजीव दीक्षित एक दिवसीय दौरे पर नोहर पहुंचे। दीक्षित ने यहां अग्रवाल धर्मशाला में एक सभा को सम्बोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि जो विकास देश में 63 सालों में नहीं हो सका वो विकास आने वाले वर्षों में शुरू होने वाला है। उन्होंने कहा कि देश को खुशहाल बनाने के लिए लोगों को प्राचीन संस्कृतिक एवं पराम्परागत कार्यों की ओर लौटना होगा। दीक्षित पतंजलि योग पीठ की भावी योजना बताते हुए कहा कि योजना के तहत देश के प्रत्येक गांव को खुशहाल बनाने के लिए 15 हजार करोड़ सदस्य बनाये जाएंगे। जिसका सिलसिला शुरू कर दिया गया। उन्होंने गाय के दूध, गोबर व गो-मूत्र से होने वाले फायदों की जानकारी देते हुए कहा कि आज के समय में गो-मूत्र सबसे अमूल्य है। दीक्षित के अनुसार गाय का मात्र गोबर व गो-मूत्र विक्रय करने से ही गाय का पालन संभव है। उन्होंने करीब एक घण्टे तक कफ, वात्त, पित्त को नियंत्रण में रखने की विधि बताते हुए स्वस्थ रहने के अनेक उपाय बताए। उन्होंने कहा कि स्वाभिमान ट्रस्ट का मुख्य उद्देश्य देश की जनता को जागरूक करके देश में खुशहाली लाना है। उन्होंने कहा कि जनता की जागरूकता से ही भ्रष्टाचार को खत्म किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि देश में 2014 में होने वाला लोकसभा का चुनाव देश को नई दिशा प्रदान करेगा। इन चुनावों में भारत स्वाभिमान के करीब 400 उम्मीदवार मैदान में होंगेे। दीक्षित ने देश के काले धन को राष्ट्रीय सम्पति घोषित करवाने, जैविक खेती को बढ़ावा देने पर बल दिया। इससे पूर्व नोहर पहुंचने पर भारत स्वाभिमान के पदाधिकारियों ने दीक्षित का पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। भारत स्वाभिमान स्थानीय शाखा के अध्यक्ष ब्रह्मानंद अग्रवाल ने आभार प्रकट किया। सभा की अध्यक्षता एडवोकेट संतलाल तिवाड़ी ने की। सभा में बार संघ के पूर्व अध्यक्ष चंद्रमोहन छाजेड़, राजेश जोशी, हनुमान दीक्षित, श्रमजीवी पत्रकार संघ के महासचिव मुकेश पारीक, रामावतार चौमाल, विनोद गोल्याण, दिनेश दीक्षित, नरेन्द्र तिवाड़ी, ओम जोशी, श्याम सुन्दर खदरिया, एडवोकेट मदन शर्मा, दिनेश खदरिया, राजेश जैन, विनोद राणीयावाला, नेतराम सैनी, प्रभु शर्मा सहित सैंकड़ों श्रोता उपस्थित थे। करीब तीन घण्टे तक चले दीक्षित के तारतम्य भाषण ने श्रोताओं पर गहरी छाप छोड़ी।
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