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शीतलहर ने सीना चीरा
Wednesday, January 06, 2010
श्रीगंगानगर, 6 जनवरी। गंगानगर क्षेत्र में कड़ाके की सदीü (डाफर) का दौर जारी है। घने कोहरे ने भी जन जीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। न्यूनतम तापमान में मामूली बढ़ोत्तरी के बावजूद ठण्ड के अहसास में कोई कमी नहीं आई है। बुधवार दोपहर लगभग 12 बजे तक घना कोहरा छाया रहा। मंगलवार रात को 10 बजे से छाए घने कोहरे ने बुधवार दोपहर तक अपना असर बनाए रखा। इस वजह से उद्यान आभा एक्सप्रैस अपने निधाüरित समय से लगभग दो घंटे देरी से पहुंची। लबी दूरी की बसों को भी देरी हुई। अन्य वाहन चालकों को पूरी सावधानी बरतनी पड़ी। अधिकांश ने वाहनों की लाइटें जलाई हुई थी। जबरदस्त कोहरे और ठण्ड के बावजूद स्कूली बच्चों को जाने के लिए तैयार करना गृहणियों के लिए काफी मुश्किल भरा रहा। बच्चे भी ठण्ड से ठिठुरते हुए स्कूलों में गए। ठण्ड को देखते हुए अभिभावकों ने स्कूलों में अवकाश घोषित करने या उनका समय बदलने की मांग उठानी शुरू कर दी है। पिछले सालों में अत्यधिक गर्मी या सदीü के दौरान स्कूलों में अवकाश अथवा समय बदलने के आदेश दिए जाते रहे हैं, लेकिन इस बार शिक्षा विभाग या जिला प्रशासन के स्तर पर इसको लेकर कोई हलचल नहीं दिखाई देती। मौसम विभाग के अनुसार बुधवार शाम को समाप्त हुए 24 घंटे के दौरान गंगानगर में न्यूनतम तापमान 6 डिग्री सेçल्सयस रिकॉर्ड किया गया, जो मंगलवार की अपेक्षा कुछ ज्यादा है, लेकिन न्यूनतम तापमान में आई इस कमी के बावजूद ठण्ड के असर में कोई राहत मिलती हुई नहीं दिखाई दे रही। अधिकतम तापमान 21 डिग्री से घटकर 18.4 डिग्री सेçल्सयस रिकॉर्ड किया गया। सुबह साढे 8 बजे मौसम में शत-प्रतिशत नमी बनी हुई थी। उत्तर भारत में कोहरे की वजह से रेलवे ने गंगानगर से अबाला के बीच चलने वाली एक्सप्रैस गाड़ी का संचालन गुरूवार से स्थगित रखने के आदेश दिए हैं। कई अन्य गाçड़यां भी इससे प्रभावित हो सकती हैं। हनुमानगढ़ (अनिल जांदू)। शहर देर रात्रि से घने कोहरे की चादर से लिपटा रहा। जिससे लोगों की दिनचर्या काफी हद तक प्रभावित दिखाई दी। शबनम की बूंदों के साथ चली धीमी-धीमी फिजाओं ने सदीü के प्रभाव को बढ़ा दिया। घने कोहरे के कारण जंक्शन और टाउन के विभिन्न मागोZ पर वाहन चालकों ने आवागमन प्रभावित ना हो इसलिए हैडलाईट का प्रयोग किया। वहीं हर जगह लोग ाी सदीü से बचने का प्रयास करते नजर आए। लोगों की सुबह की दिनचर्या ाी देरी से प्रारभ हुई। घरों मंे लोग जहां रजाईयों में दुबके रहे, वहीं कामकाजी लोगों ने अपने शरीर को ठंड से बचाने के लिए लोईया, मफलर और शॉल सहित गर्म वस्त्रों का सहारा लिया। सूर्य भी बाद दोपहर तक बादलों में छिपा रहा। जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त दिखाई दिया। सदीü के अधिक प्रभाव के कारण मवेशी अपने ठिकनों में ही रहे। स्कूल में अध्ययनरत्त छात्र-छात्राओं को भी कोहरे के कारण काफी परेशानी उठानी पड़ी।

 

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