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मर गया लादेन, पर अमेरिका ने जिदा रखा है!
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Tuesday, January 12, 2010
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लंदन, 11 जनवरी। अल कायदा सरगना ओसामा बिन लादेन की मौत आठ साल पहले अफगानिस्तान स्थित तोरा बोरा की पहाडिय़ों में छिड़ी जंग में हो चुकी है या वह किसी अमेरिकी बम से होम हो चुका है अथवा किडनी की गंभीर बीमारी से चल बसा है। ये बातें अपनी जगह हैं, परंतु इन सबके अलावा एक षडय़ंत्र की अवधारणा भी है कि मर चुके ओसामा को खुद अमेरिका अपने फायदे के लिए ङ्क्षजदा रखे हुए है।
अमेरिका पर हुए 9/11 हमले के बाद से इंटरनेट पर इस अवधारणा को लगातार विकसित किया गया है। इसके तहत अमेरिका खुफिया अधिकारी ही ओसामा बिन लादेन के वक्तव्यों को गढ़ रहे हैं। यह सब इसलिए किया जा रहा है कि ताकि अफगानिस्तान, इराक और पाकिस्तान में छेड़े गए आतंकवाद के खिलाफ युद्ध को सही ठहराया जा सके। यानी लादेन मर चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की अफगानिस्तान-पाकिस्तान नीति की समिति की अध्यक्षता करने वाले ब्रूस रीडेल के मुताबिक 'हमारे पास उसके कहीं भी होने का कोई सुराग नहीं है। किसी भी तरह की खुफिया जानकारी के अभाव में लादेन अब मिथक और अफवाह बनकर रह गया है।'
सच्चाई टेपों की
बाते सालों में लादेन के कई आडियो-वीडियो टेप आए हैं लेकिन उनकी प्रामाणिकता संदेह के घेरे में रही। तीन टेपों को तो वैज्ञानिक पूरी तरह गलत साबित कर चुके हैं। इस आधार पर, यदि कोई नकली वीडियो बना रहा है तो ओसामा के सारे टेप भी नकली ही होंगे। जानकारों के मुताबिक अल कायदा ही ऐसा एकमात्र संगठन है जो हमले की जिम्मेदारी लेता है। यही नहीं लादेन के ज्यादातर आडियो टेप ही रिलीज होते हैं। 2001 के बाद केवल दो टेपों (2004 व 2007) में उसे दिखाया गया है। कैसे माना जाए कि वे सच्चे हैं?
बात कुछ तो है
विशेषज्ञ कहते हैं कि लादेन का ट्रेडमार्क माने जाने वाली भूरी दाढ़ी अचानक काली हो गई। फुटेज में लादेन की आवाज तो सुनाई पड़ती है लेकिन उसकी तस्वीर स्थिर बनी रहती है। हालांकि अमेरिका के अधिकारी टेपों के अमेरिकी खुफिया अधिकारियों के बनाए जाने की बात से इन्कार करते हैं। उनका मानना है कि तकनीकी से सब कुछ संभव है लेकिन ऐसा नहीं किया जा सकता।
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