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समन्वित कृषि प्रबन्धन द्वारा उत्पादकता बढ़ायें : डॉ. यादव
Tuesday, February 09, 2010
- चने पर आइपीएम कार्यशाला आरम्भ श्रीगंगानगर, 08 फरवरी। कीटनाशकों के अन्धांधुध प्रयोग से न केवल मानव स्वास्थ्य व पर्यावरण के लिए खतरा है वरन इससे हमारा निर्यात भी प्रभावित होता है। अत: आज के कृषि प्रबन्धन में स्थित देखकर व उसका आकलन कर ही कीटनाशकों का विवेकपूर्ण प्रयोग करें। यह सलाह भारत सरकार के अतिरिक्त पौध संरक्षण सलाहकार तथा निदेशक (आइपीएम) कृषि व सहकारिता विभाग डॉ. वीके यादव ने कृषि अधिकारियों व किसानों को एक ट्रेनिंग प्रोग्राम में दी। रबी की फसल चने के संरक्षण पर केन्द्र के इस कार्यशाला का शुभारम्भ करते हुए मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए डॉ. यादव ने बताया कि कृषि का असली ध्येय अधिक से अधिक उत्पादकता बढ़ाना है। इसके लिए अधिक उपज देने वाली वैराइटी, बीजोपचार, सन्तुलित पोषण जरूरी है। कीटनाशकों का प्रयोग तभी करें जब मित्र कीटों व बायोपेस्टीसाइड्स के उपाय प्रभावी सिद्ध न हों और रोग कारण कीटों की मात्रा एक सीमा को पार कर जावे (ईटीएल)। स्थानीय मीरा चौक के निकट स्थित महर्षि गौतम आश्रम धर्मशाला में आज से आरम्भ होकर 9 मार्च तक चलने वाली इस कार्यशाला में किसानों को समन्वित कीट प्रबन्धन (आइपीएम) के बारे में विस्तार से ज्ञान दिया जायेगा। डॉ. यादव ने बताया कि 28 राज्यों व एक केन्द्र शासित प्रदेशों में आइपीएम के कार्यालय कार्यरत है जो देशभर में सात सौ फार्म फील्ड स्कूलों (एफएफएस) का संचालन कर लाखों किसानों को उनके खेतों में आइपीएम का ज्ञान दे रहे हैं। जालंधर से पहुंचे सीआइपीएमसी के सहायक निदेशक (एन्टोमोलोजी) डॉ. जसवीर सिंह ने कहा कि सबसे जरूरी है कि किसान खेती में सहायक मित्र कीटों को पहचाने और उनकी संख्या बढ़ाने के प्रयास करें। कीटनाशकों का उपयोग कैलेण्डर आधारित न होकर जरूरत के अनुसार हो। नियन्त्रण के स्थान पर कीट प्रबन्धन पर जोर दिया जावे। कीट वैज्ञानिक डॉ. ओपी वैश्य ने कहा कि दुश्मन कीटों से लड़ने के लिए पहले मित्र कीटों व बायोपेस्टिसाइड का ही उपयोग करें। यदि फिर भी बात न बने तो अन्त में जरूरत के अनुसार कम से कम कीटनाशक छिड़के। जैसे सीमा रक्षा के लिए सामान्यत: बीएसएफ होती है और सेना का उपयोग युद्ध के समय ही होता है। विशिष्ट अतिथि उपनिदेशक कृषि वीएस नैण ने कहा कि आइपीएम का उद्देश्य उत्पादकता बढ़ाना है जिसमें पौध संरक्षण के साथ पोषक तत्वों विशेषकर सूक्ष्म तत्वों की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण है। आज की कार्यशाला से किसान अवश्य ही लाभान्वित होकर इस क्षेत्र में चने की उपज बढ़ायेंगे। डॉ. केएल गुर्जर, समंवयक व प्रभारी सीआइपीएमसी, पीपीओ श्रीगंगानगर ने इस क्षेत्र में की जाने वाली आइपीएम गतिविधियों की जानकारी दी। सहायक कृषि अधिकारी आरसी लावा ने बदलते कृषि दृश्य की चर्चा की। मागेराम खोखर एपीपीओ सीआइपीएमसी ने मंच संचालन किया व आभार व्यक्त किया।

 

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