 |
|
MOST VIEWED |
|
|
 |
 |
 |
|
OUR ADVERTISERS |
|
|
 |
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
महिला आरक्षण बिल पर राज्यसभा की मुहर
|
|
Wednesday, March 10, 2010
|
|
नई दिल्ली 9 मार्च। भारी हंगामे और शोर-शराबे के बाद आखिरकार राज्यसभा ने तिहासिक महिला आरक्षण बिल पर मुहर लगा दी। 14 साल की लंबी जद्दोजहद के बाद महिला आरक्षण बिल ने अपना पहला महत्वपूर्ण पड़ाव पार कर लिया है। इस बिल के समर्थन में 186 सदस्यों ने वोट डाला, जबकि विरोध में सिर्फ एक मत पड़े। इसी के साथ संसद में दो दिन से चल रहे राजनीतिक ड्रामे का भी पटाक्षेप हो गया। भारतीय संसदीय प्रणाली के इतिहास में यह एक नए अध्याय की शुरूआत है। हालांकि, अभी इसे लोकसभा में दो तिहाई बहुमत से पास होना और राष्ट्रपति की मुहर लगना बाकी है।
इससे पहले सदन में दिन भर हंगामा चलता रहा। विरोधी किसी भी प्रकार से बिल को पास नहीं होने देने पर आमदा थे। सभापति ने मार्शलों के जरिए सात निलंबित सांसदों को बाहर का रास्ता दिखाया। इसके बाद सरकार की सहयोगी पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने भी यू टर्न लिया और बहिष्कार कर गई। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने भी वोङ्क्षटग का बहिष्कार किया।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की मांग पर बिल पर बहस कराई गई और उसके बाद वोङ्क्षटग की प्रक्रिया संपन्न हुई। इससे पहले हंगामे के बीच राज्यसभा में महिला आरक्षण बिल एक बार ध्वनिमत से पारित हो गया। लेकिन इस पर मत विभाजन की मांग की गई, जिसे सभापति ने स्वीकार कर लिया। ठीक मत विभाजन से पहले भारतीय जनता पार्टी ने इस पर बहस की मांग को दोहराया। इस पर सभापति ने प्रतिपक्ष के नेता अरूण जेटली को बोलने की अनुमति दे दी और सदन में कई सदस्यों ने अपने विचार व्यक्त किए।
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|